देवरी नगर हुवा भगवामय…राम नामंसे झुम उठा देवरी मंडल…
गोंदिया ( देवरी ) ; संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर देवरी मंडल में 1 फरवरी 2026 को भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन कर विधिवत रूप से की गई। अंत में भारत माता की आरती और राष्ट्रगानके साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
मंचासीन अतिथियों में मा.अनिल जी जोशी, क्षेत्रीय बैद्धिक प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सौ. वैधवीताई पटले, देवसंस्कृती गुरूकुल आमगांव, मा.पंडित भिमचंदजी शास्त्री, कथाकार आमगांव मा.कोमलप्रशादजी गौतम, तालुका प्रमुख गायत्री परीवार, मा. स्वामी चिदांनदनजी, आशुतोष महाराज शिष्य नागपूर, मा.भोजराजजी कनोजे, पिठाधीष कोलाशूर देवस्थान देवरी, मा. परशरामजी पटले सर, मा. मिश्रा महाराज, धुकेश्वरी मंदीर देवरी और मा. यादोरावजी पंचमवार संयोजक सकल हिन्दू सम्मेल देवरी उपस्थित रहे।
सुभह 9.30 बजे देवरी शहर मे ढोल, तासो के साथ श्री राम भगवान की झाकी निकाली गई, रॅलीमें मुस्लीमं भाईयोने हिंन्दू – मुस्लीम भाईचारा रखते हुये हिन्दू भाईयोपर फुलोका वर्षाव किया ! अनेक समाज संघटनाने रॅली मार्गपर नास्ते पाणी कि व्यवस्था की थी ! कार्यक्रमकी सुरवात ‘स्वयं अब जागकर हमको जगाना देश है अपना’ ईस सांघिक गीतसे सुरुवात कि गई ! सरस्वती शिशु मंदीरके क्षात्राओंने स्वागत नृत्य पेश किया, कार्यक्रमकी प्रस्तावना देवरी मंडल सकल हिन्दु संमेलनके संयोजक मा.यादोरावजी पंचमवार ईनोन्हे रखी, मंच संचालन प्रा. प्रभुजी मनगटे,सौ.उर्मिलाताई परिहार ईन्होने की और सकल हिंन्दू संमेलन मे उपस्थित सभी हिन्दू का आभार धर्मजागरण प्रमुख पवनजी अग्रवाल ईन्होने माना !
भगवान श्रीराम का त्याग और वनवासी जीवन देता है प्रेरणा…
सकल हिंन्दू संमेलन के अध्यक्ष स्थानसे अनिलजी जोशी ने कहा कि आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस अवसर पर देशभर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत लंबे समय तक परतंत्र रहा, जिसका कारण आपसी भेदभाव, जातिवाद और समाज में बिखराव था। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने युवाओं के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में की, जो आज वटवृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब हिंदू कहलाने में संकोच होता था, लेकिन आज वही समाज गर्व के साथ स्वयं को हिंदू कहता है। कठिण तपस्या, त्याग और सेवा भाव के कारण आज हिंदू समाज संगठित हुआ है। विश्वभर में 80 हजार से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। प्राकृतिक आपदा हो या मानव निर्मित संकट, संघ के स्वयंसेवक सदैव सबसे पहले सेवा कार्य में आगे रहते हैं।
जनजातीय समाज और भगवान श्रीराम का आदर्श उदाहरण…
कार्यक्रमंके वक्ता सौ. वेधवतीताई पटले ने जनजातीय समाज की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह क्षेत्र स्वाभिमानी जनजातीय समाज का रहा है, जिसने सदैव समाज और राष्ट्र के लिए योगदान दिया है। रामायण काल में वनवासी समाज ने भगवान श्रीराम के साथ रहकर धर्मयुद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भगवान श्रीराम का त्याग, मर्यादा और वनवासी जीवन आज भी प्रेरणा देता है। जो घरकी प्रमुख महिलायें अपने बच्चोको श्रीरामका आदर्श देतेहुयें उनके संस्कार अपने बच्चोको दे सकते है ! उन्होंने चेताया कि आज सोसल मिडीया के माध्यमंसे जनजातीय समाज को सेवा के नाम पर लोभ-लालच और प्रलोभन देकर उनका मतांतरण किया जा रहा है। लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उनके पूर्वज हिन्दू थे, और जो अपने मूल से दूर होंगे, वे कभी सफल नहीं हो पाएंगे।
हिंदुओं को संगठित होना होगा…
वक्ता मा.पंडित भिमचंदजी शास्त्री ने कहा, हम पहले क्या थे, अभी क्या हैं और आगे हमें कहां जाना है. इसका यथार्थ चिंतन करने के लिए हम आए हैं। एक समय हमारा देश भारत दुनिया का सिरमोर और विश्व गुरु था। आज पडोसी जेश दादागिरी कर रहे है और निरंकुश राष्ट्र बन गया है। भारत विश्व में ज्ञान फैलाता था। हमारा लक्ष्य था पूरी दुनिया को ज्ञान व सत्य का मार्ग दिखाना। लेकिन हम बिखर गए, कमजोर हो गए, और आत्मकेंद्रित हो गए। हम और हमारा परिवार बस अपनी सीमाओं तक सीमित रह गए। एक-दूसरे की रक्षा करना हमारा स्वभाव खत्म हो गया। हम असंगठित हो गए, आक्रांता आए और हम पर विजय प्राप्त की।”








