MIDC देवरी क्षेत्र में संचालित सुफलाम एथेनॉल प्लांट के खिलाफ अब जनाक्रोश खुलकर सामने आने लगा है – सांस लेना भी हो गया है संघर्ष

गोंदिया ( देवरी ) : स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआं और असहनीय दुर्गंध ने पूरे इलाके का जीवन दूभर कर दिया है।

                   “सांस लेना भी हो गया है संघर्ष”

देवरी के रहवासियों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाला सफेद धुआं और तीखी बदबू शाम होते ही पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेती है। कई लोगों का दावा है कि रात के समय हालात और बदतर हो जाते हैं, जब खिड़कियां-दरवाजे बंद रखने के बावजूद बदबू घरों में घुस जाती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार
घरों की छतों और आंगनों में सफेद राख जैसी परत जम जाती है
खुले में कपड़े सुखाना तक मुश्किल हो गया है
छोटे बच्चों और बुजुर्गों को बाहर निकलने से रोका जा रहा है

स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
निवासियों का आरोप है कि इस प्रदूषण का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। क्षेत्र में निम्नलिखित समस्याएं तेजी से बढ़ने की बात कही जा रही है
-अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों में वृद्धि
-लगातार खांसी, सीने में जकड़न
-आंखों में जलन और सिरदर्द
-त्वचा पर एलर्जी और रैशेज
-बच्चों में कमजोरी और बार-बार बीमार पड़ना
कुछ परिवारों का कहना है कि डॉक्टरों के चक्कर बढ़ गए हैं और दवाइयों पर खर्च भी। हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक चिकित्सा या पर्यावरणीय जांच से पुष्टि नहीं हुई है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की गई। लोगों ने मांग की है कि:
-वायु गुणवत्ता की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए
-प्रदूषण नियंत्रण मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए
-नियमों के उल्लंघन पर प्लांट को अस्थायी रूप से बंद किया जाए

                          “विकास या विनाश?”
लोगों का कहना है कि औद्योगिक विकास के नाम पर अगर आम जनता की सेहत और पर्यावरण से खिलवाड़ हो रहा है, तो यह विकास नहीं बल्कि विनाश है।
अब नजरें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं — क्या वे जनता की पीड़ा सुनेंगे या यह धुआं और बदबू यूं ही देवरी की हवा में घुलती रहेगी?

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