देवरी में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ — आरोपी काशीनाथ शहारे फरार, पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

गोंदिया ( देवरी ) : देवरी में एक नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला सामने आया है। FIR दर्ज होने के बावजूद आरोपी काशीनाथ शहारे (उम्र करीब 60 वर्ष, निवासी देवरी) अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
FIR के अनुसार, पीड़िता (उम्र लगभग 15 वर्ष), जो देवरी में रहकर पढ़ाई कर रही है, उसके साथ आरोपी ने जबरदस्ती हाथ पकड़कर अश्लील हरकत की। आरोप है कि आरोपी ने छात्रा के साथ अभद्र व्यवहार किया, गाल पर किस करने की कोशिश की तथा पैसे देकर मामला दबाने का प्रयास भी किया।
घटना के बाद पीड़िता  ने साहस दिखाते हुए पूरी जानकारी अपनी शिक्षिका को दी, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और FIR दर्ज की गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है:
• FIR के बाद भी आरोपी फरार क्यों है?
• क्या पुलिस की कार्रवाई सुस्त है या किसी दबाव में है?
• छात्राओं की सुरक्षा आखिर किस भरोसे??
• हॉस्टल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की घटना प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
• स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है और मांग की जा रही है कि:

➡️ आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए
➡️ मामले की निष्पक्ष जांच हो
➡️ दोषी को कड़ी सजा दिलाई जाए
पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है, लेकिन जब तक गिरफ्तारी नहीं होती, सवाल उठते रहेंगे।

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

5 thoughts on “देवरी में नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ — आरोपी काशीनाथ शहारे फरार, पुलिस की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल”

  1. आज के दौर में जहां कुछ लोग पैसे के आगे सच को दबा देते हैं, वहां Mohsin और Mukesh ने अपनी ईमानदारी और साहस से असली पत्रकारिता का उदाहरण पेश किया है। जिस तरह इन्होंने इस जघन्य अपराध को उजागर किया, वो सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि न्याय की लड़ाई है। जब कुछ पत्रकार पैसे के लिए सच को बेच रहे हैं, तब आपने दिखाया कि असली पत्रकारिता अभी जिंदा है। आपने न सिर्फ एक अपराधी को बेनकाब किया, बल्कि सिस्टम की सच्चाई भी सामने रखी। आपकी हिम्मत और ईमानदारी वाकई प्रेरणादायक है।

    Reply
  2. सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि घटना की तारीख और कार्रवाई के बीच जो देरी हुई, उसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। न्याय में देरी सिर्फ एक प्रक्रिया की कमी नहीं, बल्कि पीड़िता के साथ एक और अन्याय है। कई ऐसी बातें सामने आ रही हैं जो यह संकेत देती हैं कि इस मामले को दबाने की कोशिशें भी हुईं और कुछ प्रभावशाली लोगों की चुप्पी ने इस शक को और गहरा कर दिया है। खासकर तब, जब पीड़िता ST वर्ग से है, ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। लेकिन यहां जो रवैया दिखा, वह बेहद निराशाजनक है। समाज यह जानना चाहता है कि आखिर देरी क्यों हुई? क्या वजह थी कि समय पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई? क्या किसी तरह का दबाव या प्रभाव इस प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा था? ये सवाल सिर्फ एक केस से जुड़े नहीं हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही से जुड़े हैं। ऐसे माहौल में, जहां कई लोग चुप रहना ही सुरक्षित समझते हैं, वहां Mohsin और Mukesh ने जिस साहस और ईमानदारी के साथ इस मुद्दे को उठाया, वह वास्तव में काबिले तारीफ है। इन्होंने सिर्फ एक खबर नहीं दिखाई, बल्कि उस सच्चाई को सामने लाने की कोशिश की, जिसे दबाने की आशंका जताई जा रही थी।
    असली पत्रकारिता वही है जो सत्ता, दबाव और लालच के आगे झुके बिना सच को सामने लाए। और इस मामले में इन दोनों पत्रकारों ने वही किया है। ऐसे लोगों की वजह से ही समाज में न्याय की उम्मीद जिंदा रहती है।आज जरूरत सिर्फ एक केस की बात करने की नहीं है, बल्कि एक ऐसे सिस्टम की मांग करने की है जहां हर पीड़ित को समय पर न्याय मिले, चाहे वह किसी भी वर्ग या पृष्ठभूमि से क्यों न हो। और जो लोग सच को सामने लाने की हिम्मत रखते हैं, उन्हें समर्थन देना हम सबकी जिम्मेदारी है।

    Reply
  3. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पुलिस किसके दबाव में काम कर रही है? एक गंभीर अपराध में कार्रवाई में देरी खुद कई संदेह पैदा करती है। क्या ऐसी कानून व्यवस्था के साथ महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकती हैं? मामले में यह भी चर्चा में है कि आरोपी की पत्नी का संबंध Rajkumar Badole से जुड़ा बताया जा रहा है। अगर यह सही है, तो यह और भी गंभीर सवाल खड़ा करता है कि कहीं किसी तरह का प्रभाव या दबाव तो नहीं बनाया गया? सच्चाई क्या है, यह सामने आना बेहद जरूरी है।कुछ बातें यह भी संकेत देती हैं कि मामले को ‘सेटल’ करने की कोशिशें हुईं। अगर ऐसा हुआ है, तो यह न्याय के साथ सीधा खिलवाड़ है। कौन लोग थे जो समझौते के लिए आए? किस स्तर पर यह सब हुआ? इन सवालों के जवाब मिलना ही चाहिए।ऐसे माहौल में मैं Mukesh और Mohsin से अनुरोध करती हूँ कि आप किसी भी परिस्थिति में अपना स्टैंड न छोड़ें। आपकी निडरता ही सच को सामने लाएगी। आज जरूरत है कि हर जिम्मेदार व्यक्ति से जवाब मांगा जाए और सच को दबाने की हर कोशिश के खिलाफ आवाज उठाई जाए—क्योंकि अगर आज सवाल नहीं पूछे गए, तो कल फिर किसी के साथ अन्याय होगा।

    Reply
  4. ये सिर्फ एक केस नहीं, सिस्टम की पोल है। घटना के बाद हुई देरी साफ बताती है कि कहीं न कहीं दबाव काम कर रहा था। सवाल सीधा है पुलिस आखिर किसके इशारे पर चल रही है?
    मामले को ‘सेटल’ करने की बातें सामने आना और कुछ लोगों की चुप्पी दोनों मिलकर शक को और मजबूत करते हैं। अगर किसी भी स्तर पर प्रभाव या पहुंच का इस्तेमाल हुआ है, तो ये कानून के साथ सीधा मजाक है।और अगर सच में आरोपी पक्ष का किसी प्रभावशाली व्यक्ति से संबंध है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए क्योंकि कानून रिश्तों से नहीं, सबूतों से चलता है

    Reply
  5. इस मामले में अब किसी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं है। दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिएऐसे अपराध के लिए सख्त कार्रवाई ही न्याय का पहला कदम है
    लेकिन बात यहीं खत्म नहीं होती अगर किसी ने इस गुनाह को छुपाने, दबाने या ‘सेटल’ करने की कोशिश की है, तो वो भी उतना ही बड़ा अपराध है गुनहगार सिर्फ वही नहीं जो अपराध करता है, बल्कि वो भी है जो उसे बचाने की कोशिश करता है
    जो भी लोग सच को दबाने में शामिल थे चाहे किसी भी पद या प्रभाव में हों उनकी निष्पक्ष जांच हो और अगर दोषी पाए जाएं, तो उन्हें भी सजा मिलनी चाहिए
    कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए न रिश्ते, न पैसा, न दबाव किसी को बचा सके इस मामले में उदाहरण पेश होना चाहिए, ताकि आगे कोई भी ऐसा करने से पहले सौ बार सोचे

    Reply

Leave a Comment

और पढ़ें