देवरी के विवेक अग्रवाल की चमकी ‘किस्मत’; 1959 का 50 पैसे का सिक्का नीलामी में 42 हजार में बिका.

गोंदिया ( देवरी ) : पुरानी और दुर्लभ वस्तुओं का संग्रह करने का शौक कई लोगों को होता है, लेकिन यह शौक कब किसे मालामाल कर दे, इसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता। देवरी स्थित ‘सुनंदा ज्वेलर्स’ के संचालक विवेक अग्रवाल के पास मौजूद 1959 का 50 पैसे का एक दुर्लभ सिक्का (Coin) हाल ही में ‘कॉइन वर्ल्ड’ की नीलामी में 42,000 रुपये में बिका है। इस सौदे के बाद फिलहाल पूरे जिले के सिक्का संग्राहकों के बीच काफी चर्चा हो रही है।

क्या है पूरा मामला?
विक्की अग्रवाल को पुराने सिक्के और नोट इकट्ठा करने का शौक है। उनके संग्रह में पुराने जमाने के कई सिक्के मौजूद हैं। कुछ दिनों पहले उन्होंने अपने संग्रह से 1959 के 50 पैसे के सिक्के के बारे में ‘कॉइन वर्ल्ड’ नामक नीलामी प्लेटफॉर्म पर जानकारी साझा की थी। इस सिक्के के ऐतिहासिक महत्व और दुर्लभता को देखते हुए, नीलामी में इस पर बोली लगाई गई। अंततः 42,000 रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर इस सिक्के का सौदा तय हुआ।

क्यों खास है यह सिक्का?
1959 में चलन में आए 50 पैसे के सिक्के अब अत्यंत दुर्लभ हो गए हैं। विशेष रूप से उस समय की विशिष्ट टकसाल (Mint) से तैयार किए गए सिक्के, जिनकी संख्या सीमित थी, उनकी वैश्विक बाजार में बड़ी मांग रहती है। जानकारों का कहना है कि अग्रवाल के पास मौजूद सिक्का बहुत अच्छी स्थिति (Condition) में था, इसलिए उसे इतनी बड़ी कीमत मिली है।

पुराने सिक्के; नया निवेश
आज के दौर में ऐतिहासिक सिक्कों को केवल एक शौक के रूप में नहीं, बल्कि एक निवेश के तौर पर देखा जा रहा है। देवरी जैसे छोटे शहर से इस तरह का व्यवहार होना आश्चर्य और प्रशंसा की बात मानी जा रही है। विक्की अग्रवाल की इस सफलता के बाद अब कई लोग अपने घरों के पुराने ‘गुल्लक’ और ‘तिजोरियाँ’ खंगालने लगे हैं।

मुझे बचपन से ही पुराने सिक्के जमा करने का शौक है। मुझे अंदाजा नहीं था कि यह सिक्का इतनी बड़ी कीमत में बिकेगा। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि दुर्लभ वस्तुओं को सहेज कर रखा जाए, तो भविष्य में उनका मूल्य निश्चित रूप से मिलता है।”
विवेक अग्रवाल, व्यापारी (देवरी)

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