संवाददाता | विशेष रिपोर्ट
गोंदिया ( शहर/देवरी ) : सड़क पर दौड़ते वाहनों की रफ्तार और यात्रियों की सुरक्षा से ज्यादा अब जनप्रतिनिधियों को अपनी चमचमाती तस्वीरों की ‘बैनरबाजी’ प्यारी लगने लगी है। मुख्य मार्ग व हाईवे से जुड़ने वाले मुख्य कट्स पर रोड-साइड रेलिंगों पर लगाए गए बड़े-बड़े राजनीतिक फ्लेक्स और होर्डिंग्स ने वाहन चालकों के लिए स्थिति बेहद खतरनाक बना दी है।
‘ब्लाइंड स्पॉट’ में बदला हाईवे का मोड़
रास्ते के डिवाइडर और साइड रेलिंग पर कतार से टांगे गए इन बैनरों के कारण ‘विजिबिलिटी’ (दृश्यता) पूरी तरह खत्म हो चुकी है। हाईवे से तेज रफ्तार में आने वाली गाड़ियों को शहर की अंदरूनी सड़कों या गलियों से बाहर निकलने वाले वाहन बिल्कुल नजर नहीं आते। दूसरी ओर, शहर से बाहर निकल रहे राहगीरों को भी हाईवे की मुख्य लेन का ट्रैफिक दिखाई नहीं देता। मोड़ पर बना यह खतरनाक ‘ब्लाइंड स्पॉट’ किसी भी क्षण किसी बड़ी दुर्घटना की वजह बन सकता है।
जनसुरक्षा से बड़ी हुई खुद की ब्रैंडिंग?
जनता के वोट से चुनकर आए जनप्रतिनिधि और उनके अति-उत्साही समर्थक चौराहे और डिवाइडर को अपनी ‘पब्लिसिटी’ का मैदान समझ बैठे हैं। जन्मदिन की शुभकामनाओं से लेकर नेताओं के स्वागत तक के फ्लैक्स रेलिंग पर बांध दिए गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या जनप्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन के लिए जनता की जान-माल की सुरक्षा से ज्यादा जरूरी खुद का प्रचार रह गया है?
प्रशासन की चुप्पी पर उठते सवाल
सड़क सुरक्षा के कड़े नियमों और नेशनल हाईवे अथॉरिटी/नगर पंचायत के स्पष्ट दिशानिर्देशों के बावजूद इन अवैध बैनरों पर कोई कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। क्या जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे और मासूमों की जान जाने का इंतजार कर रहा है?
जनता की मांग:
स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों ने मांग की है कि ट्रैफिक में बाधा बनने वाले और विजिबिलिटी को ढकने वाले इन तमाम फ्लेक्स और बैनरों को तुरंत हटाया जाए, साथ ही सार्वजनिक संपत्ति व रेलिंगों का दुरुपयोग करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।







