देवरी जमीन विवाद में हाईकोर्ट से प्रशांत संगीडवार को बड़ी राहत; एड. श्रेया जैन की दलीलों पर कनिष्ठ अदालत का आदेश रद्द

गोंदिया ( देवरी ) : मौजा देवरी स्थित गट नंबर 212 और 229 की जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता प्रशांत नामदेवराव संगीडवार के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए तहसीलदार देवरी के पास भेज दिया है।
इस मामले में याचिकाकर्ता प्रशांत संगीडवार की ओर से अधिवक्ता श्रीमती श्रेया क्षितिज जैन ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष मजबूती से पक्ष रखते हुए याचिकाकर्ता को बड़ी कानूनी जीत दिलाई।

क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता के पिता नामदेवराव संगीडवार ने मौजा देवरी स्थित गट नंबर 229 (2.60 हेक्टेयर) जमीन 07 फरवरी 1973 को रजिस्टर्ड बैनामे (विक्रय-पत्र) के जरिए खरीदी थी। इसके अलावा गट नंबर 212 (3.34 हेक्टेयर) पर भी उनका मालिकाना हक है।
इस बीच, प्रतिवादी भीमराव आसाराम पुराम और अन्य ने ‘महाराष्ट्र अनुसूचित जनजाति भूमि बहाली अधिनियम, 1974’ के तहत उक्त जमीन को आदिवासी समाज की बताते हुए उसकी वापसी के लिए आवेदन दाखिल किया था।

अधिवक्ता श्रेया जैन का दमदार तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता श्रीमती श्रेया क्षितिज जैन ने हाईकोर्ट में कानूनी व तकनीकी बिंदुओं पर जोरदार दलीलें दीं:
• समय सीमा का उल्लंघन: जमीन वापसी का यह आवेदन 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दाखिल किया गया है।
• जनजाति का दर्जा: वर्ष 1973 में जब जमीन का सौदा हुआ, तब संबंधित समुदाय अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में शामिल नहीं था। इस समुदाय को 1976 के अध्यादेश के बाद यह दर्जा मिला।
• कानूनी खामियां: मामले में अन्य आवश्यक कानूनी वारिसों को पक्षकार नहीं बनाया गया, साथ ही अधिनियम की धारा 3(4) और 36(क) के प्रावधानों का पालन नहीं हुआ।

हाईकोर्ट का अहम फैसला
उच्च न्यायालय की फुल बेंच द्वारा रिट याचिका क्र. 1709/2019 में दिए गए पूर्व-निर्णय का हवाला देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि “जमीन हस्तांतरण (सौदे) के बाद अगर किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति की मान्यता मिलती है, तो उस पर भूमि बहाली कानून लागू नहीं होता।”
रिकॉर्ड में यह स्पष्ट न होने के कारण कि प्रतिवादियों के समुदाय को जनजाति की मान्यता किस तारीख को मिली, अदालत ने पुराना आदेश निरस्त कर दिया।

तहसीलदार को दोबारा सुनवाई के निर्देश
हाईकोर्ट ने मामला वापस देवरी तहसीलदार के पास भेजते हुए दोनों पक्षों को अपने अतिरिक्त दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने की छूट दी है। तहसीलदार को दोनों पक्षों की बात सुनकर कानून के मुताबिक नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया गया है।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता श्रीमती श्रेया क्षितिज जैन, प्रतिवादी 1 व 2 की ओर से अधिवक्ता एस. एस. तारम तथा शासन की ओर से अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता ए. एस. फुलझेले उपस्थित रहे।

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